खाद्य प्रसंस्करण उद्यमिता विकास प्रशिक्षण योजना (राज्य सेक्टर)

योजना का नाम :-

खाद्य प्रसंस्करण उद्यमिता विकास प्रशिक्षण योजना (राज्य सेक्टर) सामान्य / एस0सी0पी0 योजनान्तर्गत स्वरोजगार हेतु जागरूक कर तकनीकि रूप से दक्ष किया जाना।

योजना का उद्देश्य :-

इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उद्यमिता विकास हेतु बेरोजगार नव-युवक एवं नव-युवतियों को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के समस्त पहलुओं से सम्बन्धित प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें अपनी खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, ताकि उन्हें स्वयं की आय का स्रोत सुलभ हो सके और उनके साथ अन्य लोगों को भी इस क्षेत्र में रोजगार प्राप्त हो सकें। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वरोजगार प्रदान करना, पोष्ट हार्वेस्ट क्षतियों को कम करना तथा किसानों/बागवानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।

योजना का क्रियान्वयन :-

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन निम्नांकित केन्द्रों पर किया जायेगा -
वर्ष 2017-18 जनपदों में स्थित राजकीय सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्रों हेतु बजट में प्राविधानित धनराशि एवं केन्द्र पर उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या के सापेक्ष भौतिक लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं :-

क्र0सं0 केन्द्र / संस्थान के नाम जनपदों में कार्यक्रमों की संख्या
1. जनपदों में स्थित राजकीय सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र 31 सामान्य
2. तदैव 17 एस.सी.

योग

48

प्रति कार्यक्रम अनुमोदित धनराशि - रू0 90 हजार मात्र
प्रति प्रशिक्षण मदवार व्यय :-

क्र0सं0 मद धनराशि (हजार रू0 में)
1. मानदेय / रू0 500/- प्रति आमंत्रित विशेषज्ञ 20
2. प्रशिक्षण साहित्य लेखन सामग्री, बैग 10
3. यात्रा भत्ता 05
4. किराये पर वाहन 30
5. प्रायोगिक प्रशिक्षण हेतु कच्चे माल के क्रय पर व्यय 20
6. अन्यप्रासंगिक 05

योग

90

मानदेय :-

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 80 सैद्धांतिक व्याख्यान दिये जायेंगे जिसमें 40 व्याख्यान अतिथि व्याख्याताओं द्वारा मानदेय के आधार पर दिये जायेंगे। अतिथि व्याख्याता के रूप में विश्वविद्यालयों/तकनीकी शिक्षण संस्थानों/उद्योगों/ऋण प्रदाता बैंकों/उद्यमिता विकास संस्थान/प्रबंध संस्थानों/उद्योग विभाग तथा क्षेत्र के सफल खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों में सफल उद्यमी को आमंत्रित कर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग/गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं आदि से जुड़े विशेषज्ञों को व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया जाएगा तथा उन्हें प्रति व्याख्यान रु0-500/- मानदेय दिया जायेगा।

प्रशिक्षण साहित्य / लेखन सामग्री :-

इस मद के अंतर्गत प्रशिक्षार्थियों को कार्यक्रम से सम्बन्धित साहित्य, पेन, रजिस्टर (120 पेज) तथा बैग जिस पर ‘‘उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उ0प्र0’’ उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्ष 2017-18 तथा संचालक केन्द्र का नाम लिखा होगा।

यात्रा भत्ता :-

इस मद के अंतर्गत अतिथि व्याख्याताओं के यात्रा देयकों का व्यय किया जायेगा। जहाँ पर अतिथि व्याख्याताओं द्वारा घर से प्रशिक्षण स्थल तक आने-जाने हेतु राजकीय वाहन का उपयोग किया जायेगा वहाँ पर यह धनराशि व्यय नहीं की जा सकेगी।

किराये पर वाहन :-

इस मद के अंतर्गत अतिथि व्याख्याताओं के घर से प्रशिक्षण स्थल तक आने-जाने हेतु किराये के वाहन पर आने वाला व्यय तथा प्रशिक्षार्थियों के खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों व तकनीकी संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण में आने वाले व्यय का भुगतान किया जाएगा।

प्रायोगिक प्रशिक्षण हेतु कच्चे माल के क्रय पर व्यय :-

इस मद के अंतर्गत धनराशि का व्यय व्यवहारिक प्रशिक्षण हेतु आवश्यक कच्चे माल, रंग-रसायन, सुरक्षीकारक, पैकेजिंग सामग्री से सम्बन्धित मद में हुए व्यय पर भुगतान किया जाएगा।

अन्य प्रासंगिक व्यय :-

इस मद के अंतर्गत कार्यक्रम से सम्बन्धित अन्य आकस्मिक मदों में होने वाले व्यय का भुगतान किया जायेगा। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन से पूर्व एक वस्तुनिष्ठ परीक्षा आयोजित की जायेगी जिस पर सभी प्रतिभागियों को अपने उत्तर देने होंगे। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को आमंत्रित मुख्य अतिथि के हाथों पुरस्कार दिये जायेंगे।
        अवमुक्त धनराशि को किसी ऐसी मद पर कदापि व्यय न किया जाए जिसके लिए वित्तीय हस्तपुस्तिका तथा शासन/सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति एवं सहमति आवश्यक हो। अर्थात जिन मदों में व्यय के पूर्व शासन की अनुमति आवश्यक है उनमें धनराशि व्यय करने के पूर्व अनिवार्य रूप से शासन का अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा।
        कार्यक्रम हेतु निर्धारित धनराशि से किसी भी दशा में अधिक व्यय न किया जाय तथा समस्त व्यय संबंधित शासनादेश/संगत नियमों/दिशा निर्देश में उल्लिखित शर्तो/प्रतिबन्धों के अधीन किया जाए तथा व्यय में मितव्ययता बरती जाय व व्यय में किसी प्रकार की अनियमितता के लिए सम्बन्धित कार्यालयाध्यक्ष, आहरण एवं वितरण अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हांगे।

आऊट क्रम :-

50 प्रशिक्षार्थियों को विभाग, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड तथा अन्य विभागों की योजना में उनके प्रोजेक्ट बनवाकर एवं आवेदक से आवेदन कराकर उनकी छोटी/बड़ी प्रसंस्करण इकाई स्थापित करानी होगी जिसका विवरण केन्द्र पर उपलब्ध रजिस्टर पर अंकित करना होगा एवं क्लोजर रिपोर्ट में उल्लेख करना होगा।


उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु प्रस्तावित पाठ्यक्रम

प्रसंस्करण (सिद्धान्त) सैद्धान्तिक :-

खाद्य प्रसंस्करण की परिभाषा, खाद्य प्रसंस्करण/फल संरक्षण की उपयोगिता, फल संरक्षण का इतिहास-विकास-अध्यावधिक विकास, फल/सब्जियों के खराब होने के कारण-फफूँद, खमीर, वैक्टीरिया, जीवाणु उगने की परिस्थितियाँ तथा इन्जाइम्स, जीवाणु विषाक्तता/संदूषण, जैविक सड़ने की प्रक्रिया तथा स्पायलैज, रोकथाम, फल संरक्षण के सिद्धांत, चीनी द्वारा, रासायनिक सुरक्षीकारकों द्वारा, निर्जलीकरण-सुखाना-फ्रीज ड्राइंग, एसेटिक एसिड द्वारा, किणवन (फर्मन्टेशन) द्वारा अन्य (रेडियेशन आदि), जैम, जैली, फलों का मुरब्बा-कैण्डी, शर्बत, स्कैवश जूस, आर0टी0एस0 पेय, फलों की कैनिंग (बोतल/डिब्बा बन्दी), सब्जियों की कैनिंग (बोतल/डिब्बा बन्दी)।

प्रसंस्करण (विविध) सैद्धान्तिक :-

अर्द्ध प्रसंस्करण, अचार-भारतीय, यूरोपीय, सिरका-प्राकृतिक, कृत्रिम, आई0क्यू0एफ0, आई0एम0एफ0, पापड, बड़ी व अन्य पारम्परिक संरक्षण विधियों के संस्करण का ज्ञान, क्वालिटी कन्ट्रोल विधियाँ, नये उत्पाद विकसित करने की विधि, मात्रात्मक एवं गुणात्मक अम्लता ज्ञात करना, खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2006 का सामान्य ज्ञान करना, फल संरक्षण उद्योगशाला की आवश्यकताओं का आंकलन एवं गणना, प्रदूषण नियंत्रण तथा फल संरक्षण उद्योगशाला / प्रयोगशाला के निकले कूड़े का निस्तारण।

परियोजना निर्माण-प्रबन्धन एवं विपणन-सैद्धान्तिक :-

परियोजना पहचान, उपयुक्तता पूर्व आंकलन, फारमुलेशन (डी0पी0आर0), आन गोइंग अप्रेजल, अनुश्रवण, वित्तीय प्रबन्धन।

क्षेत्रीय भ्रमण तथा सर्वेक्षण :-

क्षेत्रीय प्रसंस्करण उत्पादन इकाइयों का सर्वेक्षण, विपणन सर्वेक्षण, मार्केट फोरकास्टिंग प्रत्येक समूह को क्षेत्र विशेष का आवंटन कर प्रोजेक्ट प्रोफाइल बनाने में मार्गदर्शन दिया जाना अपेक्षित होगा। सम्बन्धित किस्म की खाद्य प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण कराकर वहाँ पर व्यवहारिक/हैण्ड-ऑन प्रशिक्षण प्रदान कराना होगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम :-

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सिद्धांत एवं प्रयोगात्मक विधि का पाठ्यक्रम निम्नवत होगा तथा प्रशिक्षार्थियों की डी0पी0आर0 तैयार करनी होगी। जिसका तिथिवार विवरण प्रत्येक पाठ्यक्रम हेतु सम्बन्धित प्रभारी/नियंत्रक अधिकारी द्वारा वास्तविक रूप से बनाया जायेगा एवं उसके विवरण निर्धारित रजिस्टर पर तिथिवार अंकित करने होंगे ताकि निरीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि की जा सके।

प्रयोगात्मक कार्य (विषयवार)

प्रसंस्करण (सिद्धान्त) :-

  1. सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग तथा फफूंद और खमीर की सामान्य पहचान।
  2. प्रयोगशाला के उपकरण-भौतिक तुला, ग्लास वेयर का उपयोग तथा पहचान और सफाई।
  3. सल्फाइटेड गूदे से जेम बनाना।
  4. फ्रूट जैली बनाना।
  5. फ्रूट टॉफी बनाना।
  6. आँवला/गाजर/बेल/पेठा का मुरब्बा बनाना।
  7. पेठा/पपीता कैन्डी बनाना।
  8. स्कवैश बनाना।
  9. फ्रूट क्रश अथवा कार्डियल बनाना।
  10. टमाटर केचप बनाना।
  11. फ्रूट सॉस बनाना।
  12. टमाटर/गाजर जूस बनाना।
  13. पपीता/आम/टमाटर की चटनी बनाना।
  14. फ्रूट सिरप बनाना।
  15. रेडी टू सर्व (आर0टी0एस0) पेय बनाना।
  16. फ्रूट नैक्टर बनाना।
  17. फलों की कैनिंग अथवा बोतल बन्दी।
  18. सब्जियों की कैनिंग अथवा बोतल बन्दी।
  19. फलों को सुखाना।
  20. सब्जियों को सुखाना।
  21. शोरवेदार सब्जी की कैनिंग अथवा बोतल बन्दी।
  22. कटआउट परीक्षण करना।
  23. फ्रूट बार प्रशिक्षण।

प्रसंस्करण (विधि) प्रयोगात्मक :-

  1. टमाटर का प्रसंस्करण
  2. आँवले का प्रसंस्करण।
  3. सब्जियों का अर्द्ध प्रसंस्करण (ब्राइन द्वारा)।
  4. फल के टुकड़ों का ब्राइन तथा सल्फाइरेशन द्वारा अर्द्ध प्रसंस्करण।
  5. गूदे (बेल/आम/अमरुद) का सल्फाइरेशन द्वारा, संरक्षण।
  6. नींबू का अचार।
  7. मिर्च का अचार।
  8. मीठा अचार।
  9. मिश्रित अचार।
  10. आँवले का अचार।
  11. योरोपीय अचार।
  12. सिरका (प्राकृतिक)।
  13. सिरका (कृत्रिम)।
  14. नवीन उत्पाद विकास प्रयोग।
  15. आँवले की कैण्डी बनाना।
  16. अमचूर और पुदीनें का सॉस बनाना।
  17. चिली सॉस बनाना।
  18. हरी धनिया का सॉस बनाना।
  19. आम पापड़ बनाना (आम के संरक्षित गूदे से)।
  20. मशरुम सूप का पाश्च्युराइजेशन द्वारा सुरक्षीकरण।
  21. मशरुम अचार।
  22. परियोजना निर्माण प्रबन्धन एवं विपणन प्रयोगात्मक कार्य ।

प्रसंस्करण की डी0पी0आर0 तैयार कराना :-

नोट- उपरोक्त प्रयोगात्मक कार्य समयानुसार उपलब्ध सामग्री पर निर्धारित किये

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