योजना का कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश के चयनित जनपदों में होगा

योजना का क्रियान्वयन :-

योजना का कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश के चयनित जनपदों में होगा। स्वरोजगार के लिए जागरूक कर तकनीकि रूप से दक्ष किया जाना।

प्रशिक्षार्थियों का चयन :-

योजनान्तर्गत कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार लोकप्रिय दैनिक समाचार पत्रों/बैनर/पोस्टर आदि के माध्यम से कर योग्य प्रशिक्षार्थियों का चयन किया जायेगा। उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रशिक्षणार्थियों का चयन ऑनलाइन आवेदन पत्र प्रक्रिया प्रारम्भ होने तक ऑफलाइन प्रक्रिया प्रभावी होगी। विभागीय वेब साईट पर भी प्रशिक्षण में प्रवेश सम्बन्धी विज्ञापन अपलोड कराया जायेगा।

प्रवेश / प्रशिक्षण के लिए पात्रता :-

विभाग द्वारा संचालित उद्यमिता विकास खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु न्यूनतम् शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल उत्तीर्ण एवं प्रशिक्षार्थियों की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए तथा प्रशिक्षणार्थियों के चयन हेतु प्रदेश सरकार की आरक्षण नीति/शासनादेश का पालन किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र प्रक्रिया प्रारम्भ होने तक ऑफलाइन प्रक्रिया प्रभावी होगी। यदि आरक्षित वर्ग के प्रशिक्षार्थी उपलब्ध नहीं होते हैं पुनः एक बार विज्ञापन के माध्यम से अथवा आनलाइन आवेदन नये सिरे से आमंत्रित कर नियमानुसार चयन की कार्यवाही की जाये। अधिक संख्या में आवेदन-पत्र प्राप्त होने की स्थिति में चयन मेरिट अथवा लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाय। विभागीय वेब साईट पर इसके विवरण-यथा विज्ञापन, चयनित लाभार्थियों की सूची आदि अपलोड कराई जायें।

प्रशिक्षार्थियों की संख्या / अवधि एवं शुल्क :-

1.

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम

  * प्रशिक्षार्थियों की संख्या - 30 प्रति कार्यक्रम।
  * प्रशिक्षण अवध - 100 दिन (3 घण्टे प्रतिदिन)
  * प्रशिक्षण शुल्क  - प्रत्येक चयनित लाभार्थी से प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु रू0 300/- का शुल्क लिया जायेगा जिसकी प्राप्ति रसीद (डी-2)  सम्बन्धित को उपलब्ध कराई जायेगी एवं धनराशि तत्काल राजकोष में जमा करा दी जायेगी।
2.

ढ़ाबा फास्ट फूड रेस्टोरन्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम  

  * प्रशिक्षार्थियों की संख्या - 30 प्रति कार्यक्रम।
  * प्रशिक्षण अवधि - 14 दिन (3 घण्टे प्रतिदिन)
  * प्रशिक्षण शुल्क  - निःशुल्क। प्रशिक्षणार्थियों से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए शुल्क के रूप में कोई भी धनराशि नहीं ली जायेगी।
3.

गुणवत्ता नियंत्रण एवं हाईजीन सम्बन्धी जागरुकता प्रशिक्षण कार्यक्रम

  * प्रशिक्षार्थियों की संख्या - 50 प्रति कार्यक्रम।
  * प्रशिक्षण अवधि - 2 दिन (5 घण्टे प्रतिदिन)
  * प्रशिक्षण शुल्क  - निःशुल्क। प्रशिक्षणार्थियों से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए शुल्क के रूप में कोई भी धनराशि नहीं ली जायेगी।

सामान्य निर्देश :-

  1. कार्यक्रम के संचालन की सूचना जनपद के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों तथा निदेशालय को प्रशिक्षण प्रारंभ होने से पूर्व अवश्य दी जाए। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी/जनपद स्तरीय अधिकारी से कराया जायेगा एवं समापन के अवसर पर क्षेत्रीय मा0 जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर प्रमाण-पत्र/पुरस्कार वितरण कराया जायेगा।
  2. कार्यक्रम की मासिक प्रगति निदेशालय को प्रेषित की जायेगी । अतः प्रत्येक माह की 03 तारीख तक कार्यक्रम की भौतिक/वित्तीय प्रगति की सूचना निर्धारित प्रारुप पर उपलब्ध कराई जाए। मासिक प्रगति की सूचना ई-मेल के माध्यम से भी दी जायेगी।
  3. कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित कराते हुए संचालित कार्यक्रम का लाभ, लाभार्थियों तक पहुंचाया जाय।
  4. प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मानदेय पर आमंत्रित किये जाने हेतु विषय विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधि, भारत सरकार, उद्योगशालाओं के अनुभवी, व्यवहारिक एवं अद्यतन तकनीकी ज्ञान रखने वाले विशेषज्ञों को ही आमंत्रित किया जाये। प्रशिक्षण में व्याख्यान देने के उपरान्त ही आमंत्रित विशेषज्ञ को निर्धारित मानदेय भुगतान कर उसकी प्राप्ति रसीद अभिलेखित की जानी सुनिश्चित की जाये।
  5. ढाबा/फास्ट फूड प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण हेतु 06 कार्यक्रम चिन्हित किये गये हैं जिनमें से प्रति प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दो कार्यक्रमों का प्रशिक्षण ( कुल अवधि 2 सप्ताह ) सम्पन्न कराया जाएगा। इसका उल्लेख प्रेषित प्रगति आख्या में किया जाना अनिवार्य होगा।
  6. आवेदन पत्र/प्रमाण-पत्र, भौतिक-वित्तीय प्रगति, रोजगार सृजन संबंधी सूचनाओं से सम्बन्धित प्रारूप निदेशालय द्वारा पूर्व से निर्धारित है। इन्हीं प्रारूपों पर सूचनाएं अनुरक्षित की जानी सुनिश्चित की जाये।
  7. प्रत्येक कार्यक्रम का पूर्ण डाटाबेस तैयार किया जायेगा जिसमें प्रशिक्षार्थी का पूर्ण विवरण होगा। प्रभारी द्वारा उक्त विवरण अपने पास रखते हुए एक सेट निदेशालय को उचित माध्यम से प्रेशित किया जायेगा ताकि समय-समय पर उनका अनुश्रवण किया जा सके। प्रशिक्षार्थी को स्वरोजगार उपलब्ध कराने में प्रभारी/नियंत्रण अधिकारी द्वारा सहायता दी जाय। डाटाबेस का प्रारूप संलग्न पर दिया गया है।
  8. खाद्य प्रसंस्करण उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं ढ़ाबा फास्ट फूड् रेस्टोरेन्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों एवं नौकरी पेशा आवेदकों का यथा सम्भव चयन नहीं किया जाये।
  9. प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम की समाप्ति के उपरान्त प्रशिक्षण कार्यक्रम पर एक समीक्षात्मक रिपोर्ट निदेशालय को उपलब्ध कराई जायेगा। रिपोर्ट का प्रारूप संलग्न पर दिया गया है। प्रभारी/नियंत्रक अधिकारी इस रिपोर्ट तैयार करने हेतु उत्तरदायी होंगे।
  10. योजनान्तर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के समाप्त होने पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष की क्लोजर रिपोर्ट, लाभार्थी सूची, सफलता की कहानी एवं कार्यक्रम से सम्बन्धित फोटोग्राफ की बुकलेट हार्ड व साफ्ट कापी में निदेशालय को उपलब्ध कराया जायेगा।

    आवेदन-पत्र/प्रमाण-पत्र तथा अनुश्रवण इत्यादि हेतु रुप-पत्रों/प्रारूपों का निर्धारण :-

    1. प्रत्येक माह निदेशालय स्तर से भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
    2. वरिष्ठ अधिकारियों की टास्क फोर्स गठित की जायेगी जो कार्यक्रम के क्रियान्वयन में होने वाली कठिनाईयों को दूर करते हुए फील्ड स्तर पर कार्यक्रमों की गुणवत्ता तथा स्थानीय निरीक्षण सुनिश्चित करेंगी। मण्डल तथा जनपदवार प्रगति का अनुश्रवण निदेशालय एवं उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
    3. प्रत्येक कार्यक्रम के क्रियान्वयन के फलस्वरूप रोजगार सृजन से न्यूनतम् 10% की दर से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का लक्ष्य प्राप्त किया जाना आवश्यक होगा। जिसका कड़ाई से पालन किया जाए।
    4. खाद्य प्रसंस्करण उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रसंस्करण के सिद्धान्तों, विधियों एवं प्रयोगात्मक जानकारी देने के साथ-साथ परियोजना निर्माण प्रबन्धन एवं विपणन सम्बन्धी जानकारी भी अनिवार्य रुप से दी जाय।
    5. प्रशिक्षण के उपरान्त प्रशिक्षणार्थियों को उद्यम स्थापित करने हेतु प्रयुक्त सामग्री तथा कच्चे माल/रंग, रसायन, उत्पादित सामग्री की विपणन व्यवस्था, लाइसेन्स आदि की व्यवस्था हेतु सहयोग किया जाये।