मौन पालन

मौन पालन

मौनपालन एक उपयोगी सहायक कुटीर उद्योग है। मधुमक्खीयाँ पौष्टिक खाद्य पदार्थ शहद का उत्पादन करती है, इसके अलावा मोम, पराग, प्रोपोलिस, रायल जेली तथा डंक विष प्रदान करती हैं एवं सभी औद्यानिक फसलों में पर-परागण कर पैदावार बढ़ाने में सबसे अधिक भूमिका निभाती हैं। प्रदेश के कृषकों एवं बागवानों को मौनपालन व्यवसायिक रूप से अपनाने एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा प्रदेश के 15 जनपदों में मौनपालन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

क) केन्द्र - 1. इलाहाबाद 2. सहारनपुर 3. बस्ती 4. मुरादाबाद

ख) उपकेन्द्र - 1. लखनऊ 2. इलाहाबाद 3. गोरखपुर 4. आगरा 5. बरेली 6. वाराणसी 7. सुल्तानपुर 8. गाजीपुर 9. जौनपुर 10. फैजाबाद 11. कानपुर नगर 12. आजमगढ़

जनपद इलाहाबाद, सहारनपुर, बस्ती एवं मुरादाबाद में मौनपालन केन्द्र स्थापित हैं। इन केन्द्रों पर वर्ष में एक दीर्घकालीन एवं तीन अल्पकालीन प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन कर कृषकों / मौनपालकों को प्रशिक्षित किया जाता है। यह प्रशिक्षण विभाग द्वारा नि:शुल्क प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों को ठहरने व खाने की व्यवस्था स्वयं करनी होती है।

1- दीर्घकालीन प्रशिक्षण सत्र :

यह प्रशिक्षण सत्र 03 माह (90 दिवसीय, दिनांक 16 सितम्बर से 15 दिसम्बर तक) के लिए आयोजित किया जाता है। प्रशिक्षण सत्र की समाप्ति पर विभाग के विषय विशेषज्ञों की उपस्थिति में प्रशिक्षणार्थियों का सैद्धान्तिक व व्यवहारिक परीक्षा आयोजित करायी जाती है। प्रशिक्षण सत्र समाप्त होने के उपरान्त लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण (60 प्रतिशत् अथवा उससे अधिक अंक पाने वाले) प्रशिणार्थियों को प्रशिक्षण प्राप्त किये जाने का प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाता है। 60 प्रतिशत् से कम अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थी असफल घोषित किये जाते है, जिन्हें प्रमाण-पत्र नहीं दिया जाता है।

2- अल्पकालीन प्रशिक्षण सत्र :

यह प्रशिक्षण सत्र डेढ़ माह (45 दिवसीय) के लिए आयोजित होता है। इस प्रशिक्षण सत्र को 16 ‍दिसम्बर से 31 जनवरी, 01 फरवरी से 15 मार्च तथा 02 अप्रैल से 16 मई के मध्य संचालित किया जाता है। प्रशिक्षण सत्र की समाप्ति पर विभाग के विषय विशेषज्ञों की उपस्थिति में प्रशिक्षणार्थियों का सैद्धान्तिक व व्यवहारिक परीक्षा आयोजित करायी जाती है। परीक्षा में उर्त्तीण अर्थात 60 प्रतिशत् अथवा उससे अधिक अंक पाने वाले प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण प्राप्त किये जाने का प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाता है।

आकस्मिक मौनपालन प्रशिक्षण :

प्रदेश के 4 जनपदों सहारनपुर, बस्ती, इलाहाबाद एवं मुरादाबाद में स्थापित केन्द्रों तथा 12 जनपदों में स्थापित लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर, आगरा, वाराणसी, बरेली, सुल्तानपुर, कानपुर नगर, जौनपुर, गाजीपुर, फैजाबाद, आजमगढ़ उपकेन्द्रों पर 06 दिवसीय आकस्मिक ज्ञानार्जन शिविरों का आयोजन करके मौनपालकों / कृषकों को मौनपालन की जानकारी भी सुलभ करायी जाती है।

प्रवेश प्रक्रिया एवं प्रार्थना पत्र :

प्रवेश के लिए प्रार्थना पत्र सम्बन्धित केन्द्रों से उपलब्ध निर्धारित रूप पत्र जिसमें नाम, पिता / पति का नाम, पता, शैक्षिक योग्यता, आयु तथा कम से कम दो सम्मानित व्यक्तियों के द्वारा प्रार्थी के चरित्र का सत्यापन संलग्न होगा। सीधे अथवा अपने जिले के जिला उद्यान अधिकारी के माध्यम से सम्बन्धित प्रशिक्षण केन्द्र के नियन्त्रण अधिकारी को भेजा जाना चाहिए। प्रवेश की स्वीकृति एवं सूचना उक्त अधिकारियों से प्राप्त होगी।