औद्यानिक योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य

औद्यानिक योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य

  • औद्यानिक फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि हेतु उपलब्ध नवीनतम तकनीकी को कृषकों तक पहुचाना तथा उनको अपनाने हेतु प्रेरित करना।
  • औद्यानिक फसलों के सघनीकरण एवं फसल-चक्र में परिवर्तन कर उत्पादकों को उनके श्रम एवं कम निवेश पर अधिक लाभ पहुँचाना।
  • वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार आवश्यक निवेशों का सामयिक एवं वैज्ञानिक उपयोग करना।
  • औद्यानिक फसलों का उचित मूल्य दिलाने तथा सतत् आपूर्ति हेतु भण्डारण, विधायन एवं विपणन की सुविधाओं का विकास कराना, प्राथमिक औद्यानिक सहकारी समितियों का गठन कराकर उन्हें प्रभावी बनाना।
  • फल एवं सब्जी संरक्षण, कुकरी, बेकरी, खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम तथा मौन पालन में अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक प्रशिक्षण देकर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना तथा पान विकास के लिए कार्यक्रम चलाना।
  • बागवानों की तकनीकी समस्याओं को ढूंढना तथा प्रायोगिक परिणामों को जन साधारण तक पहुँचा
  • सेवारत अधिकारियों/कर्मचारियों तथा कृषकों को नवीनतम् तकनीकी विधाओं में प्रशिक्षण देकर तकनीकी हस्तांतरण को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करना।
  • कृषि मौसम विशेषताओं के साथ सामन्जस्य स्थापित कर क्षेत्र आधारित रणनीति के माध्यम से, जिसमें अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रोन्नति, विस्तार, फसल कटाई के बाद का प्रबन्धन, प्रसंस्करण और विपणन शामिल हैं, बागवानी क्षेत्र को सर्वांगीण विकास प्रदान करना।