परिचय:

उत्तर प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता एवं कृषि जलवायु परिस्थितियां विभिन्न प्रकार की औद्यानिक फसलों के उत्पादन हेतु सर्वथा उपयुक्त है। प्रदेश में औद्यानिक फसलों यथा-फल, शाकभाजी, मसाले, आलू, पुष्प, औषधीय एवं सुगंधित पौधे आदि के अन्तर्गत व्यापक क्षेत्र है। इन फसलों का प्रति इकाई क्षेत्र से अधिक आय प्राप्त करने, पोषण सुरक्षा प्रदान करने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति, विदेशी मुद्रा के अर्जन एवं अन्ततः प्रदेश के लोगों के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन में विशेष महत्व है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना प्रदेश में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एन.एच.एम.) से अनाच्छादित 30 जनपदों में मिशन पैटर्न पर संचालित की जा रही है। योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा 60 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्राविधानित है।

योजना का लाभ

  • पोषक सुरक्षा पर निदान।
  • मृदा स्वास्थय में बढ़ोत्तरी।
  • योजना क्रियान्वयन के फलस्वरूप निम्नवत लाभ प्राप्त होंगे।
  • प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण सुरक्षा प्राप्त होना।
  • पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जनमानस में जागरूकता पैदा करना।
  • गुणवत्तायुक्त फल उत्पादन में वृद्धि।
  • अनुत्पादक बागों में कैनोपी मैनेजमेंट/जीर्णोद्धार के फलस्वरूप उत्पादन क्षमता में वृद्धि।
  • अतिरिक्त रोजगार का सृजन।

आवेदन कैसे करें-

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये वेबसाइट upagriculture.com पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा| इसके लिए जनसुविधा केन्द्र, कृषक लोकवाणी, साइबर कैफे आदि के माध्यम से पंजीकरण किया जा सकता है।

आवेदक की पात्रता शर्ते-

  • योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये वेबसाइट www.upagriculture.com पर ऑनलाइन   पंजीकरण कराना होग।
  • कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी वर्ग के लाभार्थी पात्र होगें। अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ी जाति एवं महिला लाभार्थियों को वरीयता दी जायेगी।
  • लाभार्थी के पास स्वयं का सिंचाई साधन होना अनिवार्य है।
  • आवेदन पत्र  के साथ भू-अभिलेख संलग्न करना अनिवार्य होगा।
  • लाभार्थी कृषक के पास स्वयं का बैंक खाता होना अनिवार्य है।
  • लाभार्थी के पास पहचान हेतु वोटर कार्ड/राशन कार्ड/आधार कार्ड/पासपोर्ट में से कोई एक उपलब्ध होना चाहिए।

योजना के अन्तर्गत आच्छादित जनपद:

योजना के अन्तर्गत राष्ट्रीय बागवानी मिशन से अनाच्छादित निम्नलिखित 30 जनपदों को समावेशित किया गया है:-

‘‘गौतमबुद्ध नगर, बागपत, शामली, हापुड, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर, सम्भल, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, एटा, कासंगज, अलीगढ़, फिरोजाबाद, औरैया, कानपुर देहात, फतेहपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, अम्बेडकरनगर, अमेठी, गोण्डा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, चन्दौली, आजमगढ़, मऊ एवं देवरिया’’

योजना के उद्देश्य:

योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-

  • प्रत्येक राज्य/क्षेत्र के तुलनात्मक लाभ और इसके विविध कृषि मौसम विशेषताओं के साथ सामंजस्य रूप में क्षेत्र आधारित स्थानीय विभेदीकृत रणनीति के माध्यम से, जिसमें अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रोन्नति, विस्तार, फसल कटाई के बाद का प्रबंध, प्रसंस्करण और विपणन शामिल हैं, बागवानी क्षेत्र को सर्वांगीण वृद्धि प्रदान करना है।
  • बागवानी उत्पादन में वृद्धि करना, पोषण सुरक्षा में सुधार तथा किसानों के लिए आय सृजन में सहायता करना।
  • बागवानी विकास के लिए चल रहे अनेक योजनाबद्ध कार्यक्रमों को आपस में सहक्रियाशील रूप में सहयोगी बनाना तथा इन्हें दूसरे की ओर अभिमुख होकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • पारंपरिक समझ के सीवनहीन रूप में मिल जाने और आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना, विकसित करना और इनका प्रसार।
  • कुशल और अकुशल व्यक्तियों, विशेष रूप से बेरोजगार युवा वर्ग के लिए रोजगार सृजन के अवसरों को उपलब्ध कराना।

रणनीति:

उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित रणनीति को अंगीकृत किया जा रहा हैः

  • किसानों/उत्पादकों की उचित आय को सुनिश्चित करने के लिए संहत क्षेत्रों को विकसित कर एक छोर से दूसरे छोर तक सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना, जिसमें उत्पादन, फसल कटाई के उपरान्त प्रबन्धन, प्रसंस्करण और विपणन शामिल है।
  • निम्नलिखित के माध्यम से क्षेत्रफल आच्छादन तथा उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि:-
    • पारम्परिक फसलों के क्षेत्रों को बागों, पुष्पों, सब्जियों और मसालों के उत्पादन क्षेत्रों में परिवर्तित करना।
    • उच्च तकनीक वाली बागवानी के लिए किसानों में उचित प्रौद्योगिकी का प्रसार करना।
  • फसल कटाई के बाद की सुविधाओं जैसे- पैक हाउस को स्थापित करने में सहायता करना।
  • तकनीकी हस्तान्तरण के माध्यम से कृषकों को आधुनिकतम औद्यानिक तकनीकों से भिज्ञ कराते हुए क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना।
  • किसानों/उत्पादकों की उचित आय को सुनिश्चित करने के लिए संहत क्षेत्रों को विकसित कर एक छोर से दूसरे छोर तक सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना।
  • सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देना।

कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का उत्तरदायित्व:-

जनपद स्तर पर जनपदीय उद्यान अधिकारी योजना के उद्देश्यों की पूर्ति, कार्यक्रम कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण हेतु उत्तरदायी होगे। जनपदीय उद्यान अधिकारी द्वारा जनपद में कार्यक्रमों का क्रियान्वयन, सत्यापन, डाक्यूमेन्टेशन एवं मूल्यांकन किया जायेगा तथा वे जनपद के लिए निर्धारित लक्ष्य के अन्तर्गत कार्यक्रमों के समस्त क्रियाकलापों यथा - लाभार्थियों का चयन, गुणवत्तापूर्ण निवेशों का समय से प्रबन्धन एवं लाभार्थियों तक उपलब्धता, अभिलेखों का रखरखाव, शतप्रतिशत सत्यापन, अनुदान का भुगतान, लक्ष्यों की पूर्ति, आदि वित्तीय नियमों का पालन दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत करने हेतु उत्तरदायी होगें, इसके साथ ही नवीन उद्यान रोपण कार्यक्रम के अन्तर्गत रोपित उद्यानों में पौधों की जीवितता सुनिश्चित कराने के लिए जनपदीय उद्यान अधिकारी उत्तरदायी होंगे।

मण्डल स्तर पर मण्डलीय उपनिदेशक उद्यान क्रार्यक्रमों के समीक्षक/पर्यवेक्षकीय अधिकारी होगें। वे मण्डल की योजना से आच्छादित जनपदों में योजना के क्रार्यक्रमों के 20 प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापन करेगें। आपूर्ति के समय पौध रोपण सामग्री तथा निवेशों की गुणवत्ता सुनिश्चित करायेगें तथा आवश्यकतानुसार नमूने प्राप्त कर प्रयोगशाला से जाँच करवाकर परीक्षण परिणामों से आख्या सहित मुख्यालय को भेजेगें। क्रय किये गये निवेशों का सत्यापन भी कराएंगे तथा इनकी सामायिक व्यवस्था की समीक्षा भी करेगें।

राज्य स्तर पर मुख्यालय द्वारा योजना के जनपदों में कार्यान्वित कार्यक्रम का समय-समय पर अवलोकन, निगरानी और समीक्षा की जायेगी। योजना से आच्छादित जनपदों को कार्ययोजना के अनुरूप बजट आवंटन, धनराशि का नियमानुसार सदुपयोग तथा समर्पण एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र के समय से प्रेषण का दायित्व मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, मुख्यालय का होगा।

क्र0. विषय डाउनलोड
1. योजना के दिशानिर्देश संलग्न हैं. Size: 3.95 MB | Lang: Hindi | Uploading Date: -30-11-2017 Download