राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

योजना का नाम :-

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना।

योजना का उद्देश्य :-

योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:-
 
  • प्रत्येक राज्य/क्षेत्र के तुलनात्मक लाभ और इसके विविध कृषि मौसम विशेषताओं के साथ सामंजस्य रूप में क्षेत्र आधारित स्थानीय विभेदीकृत रणनीति के माध्यम से, जिसमें अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रोन्नति, विस्तार, फसल कटाई के बाद का प्रबंध, प्रसंस्करण और विपणन शामिल हैं, बागवानी क्षेत्र की सर्वांगीण वृद्धि प्रदान करना है।
  • बागवानी उत्पादन में वृद्धि करना, पोषण सुरक्षा में सुधार तथा किसानों के लिए आय सृजन में सहायता करना।
  • बागवानी विकास के लिए चल रहे अनेक योजनाबद्ध कार्यक्रमों को आपस में सहक्रियाशील रूप में सहयोगी बनाना तथा इन्हें दूसरे की ओर अभिमुख होकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना, विकसित करना और इनका प्रसार।
  • कुशल और अकुशल व्यक्तियों, विशेष रूप से बेरोजगार युवा वर्ग के लिए रोजगार सृजन के अवसरों को उपलब्ध कराना।
  • किसानों/उत्पादकों की उचित आय को सुनिश्चित करने के लिए संहत क्षेत्रों को विकसित कर एक छोर से दूसरे छोर तक सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना।
  • पारम्परिक फसलों के क्षेत्रों को बागों, पुष्पों, सब्जियों और मसालों के उत्पादन क्षेत्रों में परिवर्तित करना।

कार्यक्रम का नाम :-

अ- 30-नान एन.एच.एम. जनपदों में औद्योगिक विकास परियोजना :

आच्छादित जनपद- गौतमबुद्ध नगर, बागपत, हापुड़, शामली, अमरोहा, बिजनौर, सम्भल, पीलीभीत, एटा, शाहजहांपुर, बदायूं, कासगंज, अलीगढ़, फिरोजाबाद, औरैया, कानपुर देहात, फतेहपुर, हरदोई, लखीमपुरखीरी, अम्बेडकरनगर, अमेठी, गोण्डा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, चन्दौली, आजमगढ़, मऊ एवं देवरिया, रामपुर।

कार्यक्रम : 

  • निजी क्षेत्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम- बीज उत्पादन कार्यक्रम के अन्तर्गत आलू एवं मटर के आधारित बीज का उत्पादन कराया जाता है।
  • नवीन उद्यान रोपण- आम, अमरूद, लीची, किन्नो एवं टिश्यू कल्चर केले का क्षेत्र विस्तार कराया जाता है।
  • पुष्प क्षेत्र विस्तार- कट फ्लावर (रजनीगन्धा, गुलाब), बल्बस फ्लावर (ग्लैडियोलस) एवं लूज फ्लावर (गेंदा, देशी गुलाब) का कार्यक्रम कराया जाता है।
  • मसाला विकास कार्यक्रम- मिर्च, प्याज एवं लहसुन के कार्यक्रम कराये जाते हैं।
  • पुराने बागो का जीर्णोद्वार/कैनोपी मैनेजमेन्ट- आम एवं अमरुद के पुराने अफलत वाले उद्यानों का कैनोपी मैनेजमेन्ट के माध्यम से जीर्णोद्धार का कार्य।
  • आई.पी.एम./आई.एन.एम0 प्रोत्साहन कार्यक्रम- बागवानी फसलों में कीटों व रोगों की रोकथाम के लिए एकीकृत नाशी जीव प्रबन्धन का कार्यक्रम।
  • मौनपालन कार्यक्रम- कार्यक्रम के अन्तर्गत मौनवंश (हनी बी-कालोनी), मौनगृह (बी-हाइव) एवं मौनपालन उपकरण आदि का कार्य।
  • मानव संसाधन विकास कार्यक्रम (प्रशिक्षण)- चयनित लाभार्थी कृषकों को जनपद के भीतर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण।
  • एच.डी.पी.ई. वर्मी बेड की स्थापना- जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु एच.डी.पी.ई. वर्मी बेड की स्थापना कराते हुए जैविक खाद का उत्पादन कराया जाय।
  • तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन कार्यक्रम- कार्यक्रम के अन्तर्गत पैक हाउस एवं लो कास्ट ओनियन स्टोरेज (25 मिट्रिक टन) की स्थापना कराई जाती है।

ब- नर्सरी सीडलिंग रेजिंग इन लोटनल पॉलीनेट एण्ड प्रोडक्शन आफ हाई वैल्यू बेजीटेबल्स परियोजना :

आच्छादित जनपद- प्रदेश के समस्त 75 जनपद

कार्यक्रम : परियोजनान्तर्गत वर्ष 2017-18 में संकर पातगोभी, संकर फूलगोभी, संकर शिमला मिर्च, संकर टमाटर एवं संकर लतावर्गीय सब्जियां (कुकर बिट्स), संकर लौकी, संकर तरोई, संकर करेला एवं संकर खीरा के कार्यक्रम।

अनुमन्य अनुदान मदवार :-

  1. निजी क्षेत्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम- इकाई लागत रु0 35000.00 प्रति हेक्टेयर का 35 प्रतिशत अधिकतम रु0 12250.00 प्रति हेक्टेयर अनुदान देय है।
  2. नवीन उद्यान रोपण
    • आम- इकाई लागत रु0 25500.00 प्रति हेक्टेयर का 50 प्रतिशत धनराशि रु0 12750.00 पौध सामग्री, आई.पी.एम./ आई.एन.एम. एवं वर्मी कम्पोस्ट आदि पर तीन वर्षो में अनुदान देय है (प्रथम वर्ष-रु0 7650.00, द्वितीय वर्ष रु0-2550.00, तृतीय वर्ष रु0 2550.00)
    • अमरुद- इकाई लागत रु 38340.00 प्रति हेक्टेयर का 50 प्रतिशत धनराशि रु0 19170.00 पौध सामग्री, आई.पी.एम./आई.एन.एम. एवं वर्मी कम्पोस्ट आदि पर तीन वर्षो में अनुदान देय है (प्रथम वर्ष-रु0 11502.00, द्वितीय वर्ष रु0-3834.00, तृतीय वर्ष रु0 3834.00)
    • लीची- इकाई लागत रु0 28000.00 प्रति हेक्टेयर का 50 प्रतिशत धनराशि रु0 14000.00 पौध सामग्री, आई.पी.एम./आई.एन.एम. एवं वर्मी कम्पोस्ट पर आदि तीन वर्षो में अनुदान देय है (प्रथम वर्ष-रु0 8400.00, द्वितीय वर्ष रु0-2800.00, तृतीय वर्ष रु0 2800.00)
    • केला टिशूकल्चर-(बिना ड्रिप सुविधा के)- इकाई लागत रु0 102462.00 प्रति हेक्टेयर का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 40985.00 दो वर्षो में अनुदान देय है (प्रथम वर्ष-रु0 30738.00 रोपण सामग्री पर तथा द्वितीय वर्ष रु0-10247.00 आई.पी.एम./आई.एन.एम. एवं उर्वरक पर)।
  3. पुष्प क्षेत्र विस्तार-
    • कट फ्लावर - (रजनीगन्धा, गुलाब)
      • लघु एवं सीमान्त कृषक -इकाई लागत रु0 100000.00 प्रति हेक्टेयर का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 40000.00 अनुदान रोपण सामग्री पर देय है।
      • अन्य कृषक- इकाई लागत रु0 100000.00 प्रति हेक्टेयर का 25 प्रतिशत धनराशि रु0 25000.00 अनुदान देय है।
    • बल्बस फ्लावर - (ग्लैडियोलस)
      • लघु एवं सीमान्त कृषक- इकाई लागत रु0 150000.00 प्रति हेक्टेयर का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 60000.00 अनुदान रोपण सामग्री पर देय है।
      • अन्य कृषक- इकाई लागत रु0 150000.00 प्रति हेक्टेयर का 25 प्रतिशत धनराशि रु0 37500.00 अनुदान रोपण सामग्री पर देय है।
    • लूज फ्लावर- (गेंदा, देशी, गुलाब)
      • लघु एवं सीमान्त कृषक- इकाई लागत रु0 40000.00 प्रति हेक्टेयर का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 16000.00 अनुदान बीज आई.पी.एम. एवं वर्मी कम्पोस्ट पर देय है।
      • अन्य कृषक- इकाई लागत रु0 40000.00 प्रति हेक्टेयर का 25 प्रतिशत धनराशि रु0 10000.00 अनुदान बीज एवं वर्मी कम्पोस्ट पर देय।
  4. मसाला विकास कार्यक्रम-
    • प्याज एवं लहसुन- इकाई लागत रु0 30000.00 प्रति हेक्टेयर का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 12000.00 अनुदान रोपण सामग्री पर देय है।
    • मिर्च- इकाई लागत रु0 30000.00 प्रति हेक्टेयर का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 12000.00 अनुदान रोपण सामग्री एवं बायोपेस्टीसाइड नीम बेस्ड पर देय है।
  5. पुराने बागो का जीर्णोद्वार/कैनोपी मैनेजमेन्ट- (आम, अमरूद)- इकाई लागत रु0 40000.00 प्रति हेक्टेयर का 50 प्रतिशत धनराशि रु0 20000.00 अनुदान उर्वरक पौध रक्षा रसायन एवं मल्चिंग शीट पर देय है।
  6. आई.पी.एम./आई.एन.एम0 प्रोत्साहन कार्यक्रम- इकाई लागत रु0 4000.00 प्रति हेक्टेयर का 30 प्रतिशत धनराशि रु0 1200.00 अनुदान जैविक कीट व्याधि नाशकों पर देय है।
  7. मौनपालन कार्यक्रम-
    • मौनवंश (हनी बी-कालोनी)- इकाई लागत रु0 2000.00 प्रति कालोनी का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 800.00 अनुदान इटैलियन बी (एपिस मैलीफेरा) की आठ फ्रेम की कालोनी पर देय है।
    • मौन गृह (बी-हाइव)- इकाई लागत रु0 2000.00 प्रति हाइव का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 800.00 अनुदान मौनगृह लैग स्ट्राथ 20 फ्रेम कम्पलीट पर देय है।
    • मौनपालन उपकरण- इकाई लागत रु0 20000.00 प्रति सेट का 40 प्रतिशत धनराशि रु0 8000.00 अनुदान मौनपालन उपकरण के सेट जिसमें 30 किलोग्राम क्षमता का फूड ग्रेड कन्टेनर, चार फ्रेम हनी एक्सट्रेक्टर तथा मौनपालन में उपयोग होने वाले सभी उपकरण सम्मिलित हों पर देय है।
  8. मानव संसाधन विकास कार्यक्रम (प्रशिक्षण)-
    • दो द्विवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम- (जनपद स्तरीय) इकाई लागत रु0 1000.00 प्रति कृषक के सापेक्ष शत्- प्रतिशत अनुदान देय है।
  9. एच.डी.पी.ई. वर्मी बेड की स्थापना- इकाई लागत रू0 16000.00 का 50 प्रतिशत रू0 8000.00 प्रति इकाई अनुदान 12'x4'x2' (96 घन फिट) की प्री फैब्रीकेटेड स्ट्रक्चर पर देय है।
  10. तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन कार्यक्रम- कार्यक्रम के अन्तर्गत पैक हाउस एवं लो कास्ट ओनियन स्टोरेज (25 मिट्रिक टन) की स्थापना कराई जाती है।
    • पैक हाउस- इकाई लागत रू0 4.00 लाख का 50 प्रतिशत, रू0 2.00 लाख का अनुदान 9मी0 ग 6मी0 के पैक हाउस पर बैक एन्डेड सब्सिडी के रूप में देय है।
    • लो कास्ट ओनियन स्टोरेज (25 मिट्रिक टन)- इकाई लागत रू0 1.75 लाख का 50 प्रतिशत, रू0 0.875 लाख का अनुदान बैक एन्डेड सब्सिडी के रूप में देय है।
  11. संकर शाकभाजी कार्यक्रम- कार्यक्रम में अन्तर्गत संकर पातगोभी, संकर फूलगोभी, संकर शिमला मिर्च, संकर टमाटर एवं संकर लतावर्गीय सब्जियां (कुकर बिट्स) पर प्रति हेक्टेयर इकाई लागत धनराशि रु0 50000.00 का 40 प्रतिशत अधिकतम रु0 20000.00 अनुदान संकर शाकभाजी बीजों एवं लो-टनल पर देय है।

आवेदक की पात्रता शर्ते :-

  • लाभार्थी चयन में द्विरावृत्ति (डुप्लीकेसी) नहीं हो अर्थात राज्य सेक्टर या राष्ट्रीय कृषि विकास योजना या किसी अन्य समान योजना में एक ही लाभार्थी चयनित नहीं किये जायेंगे।
  • कृषक को योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु वेबसाइट upagriculture.com पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा।
  • लाभार्थी के पास उपयुक्त भूमि स्वयं के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज होनी चाहिए। कृषकों को अपने आवश्यक दस्तावेज जैसे- भूमि की पहचान हेतु खतौनी/किसान बही, किसान की पहचान हेतु वोटर आई.कार्ड./राशन कार्ड/आधार कार्ड/पासपोर्ट में से कोई एक तथा बैंक खाते की पासबुक का पहला पन्ना जिसपर खाताधारक का विवरण अंकित हो, उपलब्ध कराना होगा।
  • लाभार्थी को सम्बन्धित कार्यक्रम की प्रारम्भिक तकनीकी जानकारी हो। लाभार्थी नई तकनीकों को अपनाने हेतु जागरूक हो एवं उसकी अभिरूचि औद्यानिक कार्यक्रमों के प्रति होनी चाहिए।
  • लाभार्थी योजना के अन्तर्गत अनुदान धनराशि के अतिरिक्त सम्बन्धित कार्यक्रम पर व्यय होने वाली धनराशि तथा आवश्यक संसाधनों को वहन करने में सक्षम हो।

आवेदन कैसे करें :-

योजना का लाभ पाने के लिए इच्छुक कृषकों को वेबसाइट upagriculture.com पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। कृषक साइबर कैफे/जन सुविधा केन्द्र/कृषक लोकवाणी से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभार्थियों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जायेगा। अधिक जानकारी के लिए जनपदीय उद्यान अधिकारी से संपर्क करें।

योजना के मार्ग- निर्देश :-

संलग्न है।